Sunday, January 1, 2012

खूबसूरत चारपाई सा बुना शरीर 

कुछ हाड़ मॉस की नुमाइश करता

ढोता बोझ इस कठिन जीवन का 

कुछ खाली पेट कुछ पानी पी! 






लबों को फिर मेरे मुस्कुराना आ गया
 
किसी ने लौट कर वापस, ये खज़ाना दे दिया!

मुद्दतें हुई हमें यूँ कुछ गुनगुनाये हुए
 
लबों को आज फिर एक मीठा तराना मिल गया!

दिल ने भी मेरे छेड़ा है कोई नया फ़साना 

वो जो बैठा था बरसों से थामे हाथ तनहाइयों का !

आँखें मचल अब करतीं है हाले- बयां सबसे 

जिसे कभी वो चाँद,तारों से भी छुपाया करती थीं

tsunamiiiiiiiii


खड़ी हूँ आज कनारे तेरे,तो तू न समझ ये समंदर



कि मेरे पैर छू लेने पर कर दूँगी तुझे मुआफ मै !




तूने छीना है मुझसे मेरे लोगों को ओ सुनामी


 ,
अब न पिघलेगा दिल मेरा तेरी किसी गुहार पर!




न जाने कितने ही घर-परिवार उजाड़े हैं तूने



फिर भी चाहता है कि कर दूं मुआफ मै तुझे!




ऐसा क्या छीन लिया था मेरे लोगों ने तुझसे



कि तू कहर बरपा गया जीवन पर उनके!




सिर्फ ज़मीन का छोटा सा हिस्सा ही तो लिया था 



जिस पर गुज़र करते थे परिवार का वो कुछ बेच-खाकर!




कैसा तू राक्षस है कि पेट भरता ही नहीं तेरा कभी 



न जाने कितने ही जहाजों को खा गया तू लोगों समेत!




देख देख कुछ तो सीख तू ओसामा से तो आज 



कितनी ही जानें लेने के बाद पड़ा है शांत आगोश में तेरे!




पर तू है की थमने का नाम ही नहीं लेता,



बनाता है नित नए लोगों को ग्रास अपना तू!
 
आज छुपा है चाँद चुरा कर वो हर ख़ुशी

जो मिली थी हमे कुछ दो पल पहले ही 

हमने भी चुरा ली है उसकी दो बूँद रौशनी
 
कि जब वो सोया होगा ख्वाबों में चांदनी के
 
हम चला लेंगे काम उस दो बूँद रौशनी से!





mere sher......

आँखों से बहते है अश्क दीदारे-यार के लिए 

दिल के ज़ख्म रिसते हैं विसाले -यार के लिए 

ऐसा नहीं कि बेचेन न होंगे वो भी मिलने के लिए

फिरते होंगे आलमे -बेगानगी में वो पैमाना लिए!






सुनो तुम जो चले गए मेरी नींदें चली गई 

मेरे दिल का चैन मेरी खुशियाँ चली गईं

जीने कि हर वो चाह,वो आस चली गयी
 
जिसकी लौ जली थी कुछ रोज़ पहले ही!




हम जो देखते हैं अब आइना

हमें कुछ अजीब सा लगता है 

वो जो चेहरा कभी हमारा था 

उसपर अक्स किसी और का पड़ता है!



vo baarish......

वो बारिश ही क्या जो सबको बता कर आये
 
दुनिया को पहरे पर बिठा कर आये!

वो आये तो कुछ ऐसे आये की सीथे

आँखों से होती मेरे दिल में उतर जाये!

मिटा दे जन्मों की प्यास जो है इस दिल में

और छुपा ले हमें अपनी पलकों की झील में!

ikrar...

मैंने कभी न चाहा कि तुम इकरार करो
.... 
मैनें कभी न चाहा कि तुम मुझे प्यार करो
 ..
मैंने कभी न चाहा कि तुम आओ कब्र पर मेरी
.. 
पर हाँ!गर आ ही गए हो तुम दर पर मेरे भूले से
.. 
तो बहा दो आज, दो बूँद अश्क मिटटी पर मेरी.

कर लूंगी तस्सल्ली ये सोचकर मेरे दिलबर कि
.. 
चलो राहत तो दी तुमने,भले ही कुछ देर से सही
.. 
आज देकर रूह को मेरी अपने आंसुओं की गर्मी!

imtihaan......

माना कि इम्तिहान लेता है तू सभी का इस जहाँ में
 
पर इतना भी मुश्किल न ले कि मैं बस टूट ही जाऊं!

माना कि मेरे ख्वाब नाज़ुक है कांच से भी ज्यादा 

पर शायद इतने भी नहीं कि उन्हें संवारा न जा सके!

माना कि मेरा दिल कुछ ज्यादा ही मांग लेता है तुझसे


पर एक बार देकर तो देख तू फिर कभी अपना न रहना चाहेगा !

माना कि तेरी फेहरिस्त में हम अव्वल दर्जे में नहीं आते


पर फिर भी जब तू चाहेगा सबसे पहले नज़र आयेंगे हम!