Sunday, January 1, 2012

ikrar...

मैंने कभी न चाहा कि तुम इकरार करो
.... 
मैनें कभी न चाहा कि तुम मुझे प्यार करो
 ..
मैंने कभी न चाहा कि तुम आओ कब्र पर मेरी
.. 
पर हाँ!गर आ ही गए हो तुम दर पर मेरे भूले से
.. 
तो बहा दो आज, दो बूँद अश्क मिटटी पर मेरी.

कर लूंगी तस्सल्ली ये सोचकर मेरे दिलबर कि
.. 
चलो राहत तो दी तुमने,भले ही कुछ देर से सही
.. 
आज देकर रूह को मेरी अपने आंसुओं की गर्मी!

imtihaan......

माना कि इम्तिहान लेता है तू सभी का इस जहाँ में
 
पर इतना भी मुश्किल न ले कि मैं बस टूट ही जाऊं!

माना कि मेरे ख्वाब नाज़ुक है कांच से भी ज्यादा 

पर शायद इतने भी नहीं कि उन्हें संवारा न जा सके!

माना कि मेरा दिल कुछ ज्यादा ही मांग लेता है तुझसे


पर एक बार देकर तो देख तू फिर कभी अपना न रहना चाहेगा !

माना कि तेरी फेहरिस्त में हम अव्वल दर्जे में नहीं आते


पर फिर भी जब तू चाहेगा सबसे पहले नज़र आयेंगे हम!

aankhmichoni.....

कल देखा तो सूरज
कुछ अलग ही लगा 
कुछ बहका बहका
कुछ मदमस्त सा!

बच्चों सा शर्माता 
कुछ झूमता सा 
कभी दौड़ लगाता
कभी मुंह छुपाता!

कभी खेलता .....
आँख मिचौनी बादलों संग 
कभी घूमता अठन्नी
सा पूरे आकाश में!

ना जाने ऐसा क्यों था 
वो कल जो नज़रें चुराता
हर उससे जिसे 
तपाता था वो हर रोज़!

कुछ अजीब था वो... 
देखा तो पाया एक..... 
शराबी जल की जगह 
मदिरा चढ़ा गया था
शायद उसे उस रोज़ !

दिल उस पर मेरा भी कभी आता है!.......

माना कि वो उसका है पर दिल
 
उस पर मेरा भी कभी आता है!

देख कर उसको मुस्कुराता हुआ 

दिल मेरा भी कभी मचल जाता है!

छोटी सी तमन्ना रखता है ये दिल

कि मै भी बहल जाऊं उसको पाकर!

देख मुझे यूँ मेरा चाँद भी पिघलता है 

रफ्ता रफ्ता वो भी मुझसा ही घुलता है!

chand......

ए चाँद आज तू कुछ जुदा सा लगता है ,
रंग धरती का तुझ पर चढ़ा सा लगता है
ऐसी क्या खता हुई मुझसे मेरी जान 
कि तू मुझसे कुछ खफा सा लगता है!

कब से तेरी राह में आँखें बिछाए बैठी हूँ ,
पिछले कुछ दिवस सदियों से जिए बैठी हूँ
जब भी कोई पत्ता झरा शाख से अँधेरे में
लगा जैसे की तू कुछ कह रहा हो मुझसे!

तेरी यादों के झरोखों से जब झाँका मैंने 
सिर्फ अपना चेहरा पाया तेरी आँखों में मैंने 
पर फिर क्यों आज ये दिल इतना बेचेन है 
लगता है खुद पर अब ऐतबार खो दिया मैंने!

तू ही बता दे मुझको अब, क्या मैं सही हूँ ?
या ये सिर्फ मेरा डर है तुझसे जुदा होने का
आज कि रात कर ले एक वादा तू मुझसे 
कि कल न होगा धरती का साया तुझ पर!

हम फिर पहले से मिलेंगे पहाड़ों के पीछे
दुनिया से परे चांदनी की चादर में लिपटे 
तू फिर मेरी मांग सजा देना सितारों से
मैं फिर बुन लूंगी सपने सतरंगी संग तेरे!

piya ki nagariya.....

जा रे पवन तू ही चला जा उनकी नगरिया!
भूल न जाना, ले जाना साथ अपनी चंदनिया! 

जिसे देख वो खुद ही पहचान जायेंगे! 
हाल मेरे दिल का वो जान जायेंगे!

तुम दोनों को साथ देख,याद कर लेंगे! 
जब घूमते थे सागर किनारे पिछली बार!

रेत पर बनाते जाते थे हम क़दमों के निशान! 
और तुम मिटाते जाते थे उनके नामोंनिशान! !

जब पूछा मैंने तुमसे तो हंस के बोले थे तुम! 
कितनी भोली हो! जग को नहीं जानती क्या तुम?

जिस दिन देख लेगा इन दो क़दमों को साथ!
कर देगा जुदा पल भर में छुड़ा दोनों के हाथ! 

देख हमको देख, कैसे जुदा होते हैं हम हरबार!
मिल पाते हैं सिर्फ जब अमावस्या हो मेहरबान !

लॉन्ग ड्राइव...........



सुनो! याद है उस दिन कितने दिनों बाद 



मुसलाधार बारिश हो रही थी और



मैं जिद्द कर् बैठी लॉन्ग ड्राइव पर जाने की



तुम ना ना करते फ़िर भी कार निकाल लाये थे!




दोनों कितनी दूर निकाल आये थे बारिश में



ऍफ़ एम् पर कोई रोमांटिक गीत बज रहा था



हाँ याद आया "रिम झिम गिरे सावन


 .... ....."
और कैसे हम दोनों एक दूसरे में खो गए थे !




तुम्हे याद है मैं तुम्हारे कांधे पर रख के सर



एक हाथ पकड़ तुम्हारा बैठी रही थी और तुम



बार बार हाथ छुड़ाते थे गेअर बदलने के लिए 



और मैं फ़िर हाथ पकड़ लेती थी झट से तुम्हारा!




सड़क पर सिर्फ दूर दूर तक बारिश ही बारिश



कोई नहीं दिखता था पागल हमसा सड़क पर!



बस मेरा मन करता था यूहीं चलते चले जाएँ हम



और वो हसीं वक्त वहीँ थाम जाये मेरे तुम्हारे संग!




सुनते हो! आज वो खूबसूरत लम्हा लौटा दो मुझे 



जो कहीं दूर छूट गया है मुझसे रोज़ की भाग दौड़ में



देखो देखो! आज फ़िर कितनी तेज़ बारिश हो रही है



सुनो ले चलो न मुझे फ़िर एक और लॉन्ग ड्राइव पर!